with love to indore

Saturday, June 2, 2012

Farmer in MP

किसान
खून से सींचा है मैंने
अनाज का दाना दाना
मगर
बेचने में आ रहा है पसीना
क्योंकि भरने के लिए
सरकार के पास नहीं है बारदाना

|

राज्य केन्द्र को, केन्द्र राज्य को
बता रहा है गैर जिम्मेदाराना
मगर
बारदाने के इस खेल में
खुले आसमान के नीचे
मेरी आँखों के सामने
बारिश में भीग रहा है
अनाज का दाना दाना |

कहने को तो मैं हूँ अन्न दाता
मगर ये नाम अब मुझे रास नहीं आता
यो तो पेट देश का भरने के लिए
धरती पर हल चलाता हूँ
खून पसीने से फसल भी बहुत उगाता हूँ
मगर,
राज की अति के आगे
अपना ही पेट नहीं भर पता हूँ
इसलिए मज़बूरी में फंदे पर झूल जाता हूँ |

हल्ला तो हर कोई करता है
मेरे दुःख में दुखी हो कर
आँखों में घडियाली आंसू भी है भरता
मेरे दुःख में दुखी हो कर
हालत मगर ऐसे है यहाँ
की कोई भी, मेरी लाश पर
राजनैतिक रोटियाँ सकने से
परहेज नहीं करता है यहाँ |

यह सब देखकर
मैंने भी अब ठाना है
बहुत बहा दिया खून-पसीना
अब हल नहीं चलाना है
धरती को बेचकर अब
जिंदगी ऐश से बिताना है |

शंकर लाल , इंदौर , मध्यप्रदेश
shankar_kumawat@rediffmail.com

1 comment:

  1. Yes that is right but something is still going wrong.
    government is doing some good work in this particular thing........

    so the problem may be solved soon

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