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Wednesday, September 1, 2010

MP IFMIS : fishy dealing with TCS

for the first time a state government and that too Madhya Pradesh has awarded a contract on net present value basis...It is understood that both bids were very close..


टीसीएस को मिला मप्र से ई-गवर्नेंस का ठेका
कंपनी को राजस्व विभाग के कामकाज को बेहतर बनाने का बंदोबस्त करना है
विभु रंजन मिश्रा / बेंगलुरु August 24, 2010

भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी को मध्य प्रदेश सरकार से ई-गवर्नेंस का एक ठेका मिला है। इसके तहत कंपनी को प्रदेश के राजस्व विभाग के कामकाज को बेहतर बनाने का बंदोबस्त करना है। 150 करोड़ रुपये के इस ठेके के लिए टीसीएस के अलावा इन्फोसिस टेक्रोलॉजिज ने भी बोली लगाई थी।

इस कंपनी ने हाल ही में बोली लगाने के लिए एक अलग इकाई स्थापित की है।इन्फोसिस को कम पैसे की बोली लगाने के बावजूद भी टीसीएस से मात खाना पड़ा। क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार ने परिचालन को आधार बनाकर टीसीएस को वरीयता दी। सरकार ने पाया कि परिचालन में इन्फोसिस ने टीसीएस से ज्यादा पैसा खर्च करने की बात कही है।

बोली की प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कम बोली लगाने के बावजूद भी इन्फोसिस दूसरे मामलों में टीसीएस को पछाड़ नहीं पाई।इस ठेके के बारे में जब टीसीएस से संपर्क किया गया तो कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि हम किसी एक सौदे पर बयान नहीं देते। वहीं इन्फोसिस का पक्ष जानने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं।

मध्य प्रदेश सरकार 'एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना तंत्र' शुरू करने जा रही है। ताकि राज्य में होने वाले वित्तीय लेन-देन की निगरानी होती रहे। इस तंत्र के लिए सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म टीसीएस मुहैया कराएगी। इसकी मदद से प्रदेश का राजस्व विभाग अपने कई कार्यों को सुविधाजनक ढंग से निपटा सकेगा।

टीसीएस उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में से एक है जिन्होंने देश के घरेलू बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत बनाए रखी है। कंपनी ने कॉरपारेट क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र में पकड़ बनाए रखा है। कंपनी के कुल राजस्व का 8 फीसदी भारतीय बाजारों से आता है।

एनएसई, नैशनल सिक्यूरिटिज डिपोजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) जैसी कंपनियां टीसीएस की ग्राहक सूची में शामिल हैं।

कुछ दिनों पहले टीसीएस के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक ने कहा था, 'पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार में आईटी खर्च में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, भारतीय बाजार में ज्यादातर राजस्व नए सिस्टम विकास से आता है।

यह सालाना आमदनी की संभावनाओं पर असर डालता है और इस वजह से कोई भविष्यवाणी करना कठिन हो जाता है। हमारे घरेलू कारोबार में वृद्धि हो रही है। भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।'

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