with love to indore

Wednesday, March 24, 2010

animal farm and bhartiyan jugaad party

ये कहानी है तीन जानवरों की .... माफ़ कीजिये जानवर नहीं पत्रों की . क्योंकि जानवर कहने पर मेरे पत्र तो नहीं लेकिन कुछ अन्य लोग जरूर ऐतराज़ कर सकते है . इन तीनो मैं कोम्मों या सामान बात ये है की तीनो ही इंदौर नमक शहर के बाशिंदे है और इंसान नहीं कहलाते है. बस यहीं आकर इनके बीच की समानताएं ख़त्म हो जाती है.
तीनो रहते है इंदौर के बहार स्तिथ 'ग्वाला कालोनी' में. अब ये नह पूचियेंगा की आपको नहीं पता ये कौन सी जगह है. महोदय ये वाही स्थान है जहाँ पर शहर के बीचों बीच गौ पालन करने वालों को बसयाँ जान है. अब भले ही शहर में कईं वर्षो से हिंदूवादी पार्टी का शासन हो जो गौ माता के नाम का दंभ भारती हो और गौ मंगल यात्रा भी निकलती हो, लेकिन शहर के बाजारों में गौ मन को डंडे खाते हुए.. कुत्तो और सूअरों से अपना खान शेयर करते हुए और धुप और बारिश में सडको पर छाँव ढूँढ़ते हुए (क्योंकि वे अपने मालिक के लिए भैंसों की तरह कीम्तीं नहीं होती) इंदौर के बच्चे बच्चे ने देखा है लेकिन भारतीय संस्कृति की रक्षक पार्टी के सूरमाओं ने नहीं देखा है.
खैर एक गाय बेचारी नेताओ की बातो का भरोसा करके अपने बछड़े को लेकर कई बरस पहले इस ग्वाला कालोनी में आ गयी थी तब यहाँ एक संकर प्रजाति का कुत्ता भी रहता था. उसकी माँ तो एक गली की मरियल सी कुतिया थी लेकिन बाप किसी रईस आदमी का बिग्द्दैल 'ग्रेट दाने' किसम का कुत्ता था और जैसा की हर अविअध संतान के साथ होता है इसे भी दर दर की ठोकरों के सिवा कुछ न मिला तो इसने इस उआद पड़ी कालोनी जिसमें सर्कार ने सहदे तो बनवा दिए थे पर न कोई बिजली थी न पानी को ही अपना ठिकाना बना लिया.
खैर एक दिन इनकी जिंदगी में एक नए दोस्त की दस्ताक हुई ये दोस्त थी एक सफ़ेद शेरनी की आत्मा जिसे नगर निगम वाले यहाँ दफना कर चले गए थे. इस आत्मा ने जो कहानी इन् दोनों को सुने उसने इन् दोनों की जिंदगी ही बदल कर रख दी.शेरनी इंदौर के जू में रहती थी और कुछ ही दिन पहले इसने तीन बछो को जनम दिया था. उनके जनम के अगले दिन रविवार था और जबकि ये शेरनी जचकी के बहार भी नहीं आई थिस इंदौर के एक राष्ट्र प्रस्सिध भाजपा नेता ( जो संसद सदस्यता भी खो चुके हैं लाभ के पद पर रहने के कारन) के परिवार के महिलाएं और बच्चे दंदंकर घुसे चले आयें. उनका वहां अन्दर तक चला आया जबकि किसी को भी ये अनुमति नहीं है. दिन था रविवार जिस दिन जू बंद होता है. सफ़ेद शेर खास किसम का जानवर होता है और ये बची तो अभी एक ही दिन के थे इन्हें तो खुले पिंजरें में भी नहीं रखा जाता लेकिन नेताजी के परिवार के मनोरंजन के लिए छोटे छोटे बचू को संक्रमण की परवाह किये बगैर बहार निकला गया उनके पपियां ली गयी और उनके साथ फोटो खींचे गए.
नतीजा कुछ ही दिनों में ये शवक चल बसें. इनकी माँ का हाल बेहाल था पर वो फ़रियाद करती तो किस्से. नगर निगम के चुनाव होने वाले थे और अचार संहिता लगी हुई थिस. इंसानों के काम रुके पड़े थे तो इस बेजुबान की कौन सुनाता. खैर चुनाव हुए , नए महापौर निर्वाचित हुए और एक दिन उनका जू दौरा निशित हुआ. लेकिन अब चौकने की बरी शेरनी की थी क्योंकि ये तो वाही नेताजी थे जिनके परिवार के हाथ इसके बचू के खून से रंगे थे..... जब भक्षक ही रक्षक का लिबास पहन ले तो किस्से शिकायत की जाए?
और इसीस निराशा में इस शेरनी ने आत्महत्या कर ली और इसकी आत्मा इस ग्वाला कालोनी में भटकने लगी. यहाँ से भाग कर गाय का बचदा जो अब बैल बन चुका था सीधे इस गौ रक्षक पार्टी के ऑफिस जा पहुंचा. गौ रक्षक पार्टी अगले ही दिन महंगाई के खिलाफ मोर्चा निकलने वाली थी और सोचा गया की क्यों न इस बछड़े को बैलगाड़ी बनाकर उसकी सवारी की जाए. सो अगले दिन इस बैलगाड़ी पर पूरी की पूरी नगर भाजपा स्वर हो गयी फोट खीचने और प्रदर्शन में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए. जब बैल बेचारा वजन सह न सका और धीरे धीरे चलने लगा या फिर रुकने लगा तो उसके गुप्त अंग पर चाबुक से प्रहार किया गया..... ये सब उन्ही रास्तों पर हुआ जिनपर कुछ ही दिन पहले गौ मंगल यात्रा निकली थी और इसी बैल की मन के चरण इन्ही नेताओ ने धुयें थे और उससे घन खिलाई थी.

लेकिन हमारी खाने का अंत सुखद है. हमारा सनकर नसल का ग्रेट दाने कुत्ता जो शेरनी की आत्मा की दर से ग्वाला कालोनी छोड़ कर भगा था एक शराबी watchmen के हथून पद गया जिसने इसे इसी भर्तियाँ संक्राति की पोषक पार्टी के सबसे कट्टर हिन्दू नेता के ऐ बी रोड स्तिथ स्कूल कम होटल कम फार्म हाउस पर ले जाकर छोड़ दिया. यहाँ नेताजी के वंशज शहर में तो भारित्यां स्नाक्रती का धिन्डोरा पिटते थे लेकिन इस फार्म हाउस पर ऊँची नसल के कुत्तो और ऐसे ही चीज़ों पर वो पैसा खर्च करते थे जो इनके क्षेत्रे की जनता से धार्मिक आयोजनों के नामे पर करोरोदों में उगायाँ जाता था.
तू इस तरह हमारे कुत्ते के जीवन का उद्धार और बड़ा पार उसी पार्टी के लोगो ने किया जिसके लोग हमारे बैल और शेरे के जीवन की तकलीफों के लिएजिम्मेदार थे.

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