with love to indore

Monday, January 25, 2010

let's play pilot pilot chief secretary sir..

इंदौर। मध्यप्रदेश फ्लाइंग क्लब लिमिटेड ने प्रदेश के मुख्य सचिव राकेश साहनी के पुत्र को प्रशिक्षण शुल्क में करीब छह लाख रूपए की छूट दी, तो प्रदेश सरकार भी क्लब पर निहाल हो गई। सरकारी खजाने से क्लब को 2007-08 में दो लाख रूपए अनुदान के रूप में जारी कर दिए। बेटे की फीस में रियायत व अन्य आरोपों को लेकर साहनी के खिलाफ लोकायुक्त के पास शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं। हालांकि बताया जाता है कि इसमें से एक मामले में खात्मा काट दिया गया था। प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक अघिकारी की खास दिलचस्पी के चलते मध्यप्रदेश फ्लाइंग क्लब अचानक चर्चा में आ गया है। इस क्लब की गतिविघियां इंदौर और भोपाल में संचालित होती हैं।

एक पूर्व प्रशासनिक अघिकारी ने बताया कि फ्लाइंग क्लब को राज्य व केंद्र सरकार से तमाम रियायतें व भारी अनुदान हासिल होते हैं। इसलिए शासन का कोई अघिकारी क्लब से लाभ उठाता है तो कदाचार की श्रेणी में माना जाएगा। क्लब को वर्ष 2001 से कोई अनुदान नहीं मिल रहा था। साहनी के बेटे समीन ने नवंबर 2006 में यहां फ्लाइंग सीखनी शुरू की। क्लब को वर्ष 2007-08 में दो लाख रूपए का अनुदान दे दिया गया।

एक साल पहले शिकायत
इंदौर के श्रीराम गोयल ने पिछले साल 21 जनवरी को राकेश साहनी के खिलाफ लोकायुक्त को शिकायत की थी। इंदौर के ही पीयूष जैन ने भी साहनी व उनके बेटे समेत सात लोगों के खिलाफ लोकायुक्त तक शिकायत पहुंचाई थी। पेशे से इंजीनियर जैन ने साहनी पर क्लब के कोषप्रमुख से मिलीभगत कर अवैध लाभ अर्जित करने का आरोप लगाया था। बीते वर्ष 16 जनवरी को शिकायत क्रमांक 2990/08-09 के तहत जैन ने लोकायुक्त से गुहार लगाई थी कि राकेश साहनी, लोकसेवक व अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून 1988 के तहत कार्रवाई की जाए। बताया जाता है कि इनमें से एक शिकायत में खात्मा काटा जा चुका है।

No comments:

Post a Comment