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Sunday, October 25, 2009

concern of Madhya Pradesh government about health care of tribals

झाबुआ/भोपाल। पश्चिमी मध्यप्रदेश के तीन आदिवासी जिले झाबुआ, आलीराजपुर एवं धार की कुल 30 लाख से अधिक की आबादी के लिए सरकार ने सिर्फ एक ड्रग इंस्पेक्टर यानी औषधी निरीक्षक की तैनाती की है। इस निरीक्षक के पास झाबुआ-आलीराजपुर जिले की लगभग 70 वैध मेडिकल की दुकानों व धार जिले की लगभग 90 मेडिकल दुकानों में यह देखने का अधिकार है कि उन दुकानों में नकली या घटिया या कथित रूप से एक्पायरी दवाइयां तो नहींबिक रही है। साथ ही इसी निरीक्षक के पास दोनों जिलों के लगभग 1500 से अधिक अवैध चिकित्सकों द्वारा क्लीनिक में कथित रूप से संचालित मेडिकल स्टोर को देखने का भी दायित्व है। व्यवहारिक रूप में एक अधिकारी क्या यह सब कुछ सहज रूप से कर सकता है? यह सरकार सोचने को तैयार नहींहै।

रस्मअदायगी के लिए की गई तैनाती: निश्चित रूप इस तरह के आश्चर्य इस देश में ही देखने को मिल सकते हैं। आदिवासी बहुल झाबुआ एंवं आलीराजपुर जिलों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में फैली बदहाली से सभी वाकिफ है। लेकिन इसे दुरुस्त करने की सरकारी मंशा क्या है? सरकार किस तरह से आदिवासियों के स्वास्थ्य की चिंता करती है? यह ड्रग इंस्पेक्टर की झाबुआ -आलीराजपुर जिले में महज रस्मअदायगी के लिए तैनाती से ही समझ में आता है। झाबुआ-आलीराजपुर जिले की 14 लाख की आबादी के लिए धार में ड्रग इंस्पेक्टर के दायित्व तय किए गए हैं। साथ ही सप्ताह में एक बार झाबुआ जिले में एवं एक बार आलीराजपुर जिले में आकर दवाइयां मानक स्तर की बिक रही है यह सुनिश्चित करने का दायित्व भी ड्रग इंस्पेक्टर को सौंपा गया है। दूसरे शब्दों में सप्ताह में महज दो दिन आकर ड्रग निरीक्षक दोनों जिलों में सही दवाइयां बिक रही है यह सुनिश्चित करेगा। निश्चित रूप से व्यवहारिक रूप में देखा जाए तो यह संभव नहींहै

जेनरिक/एक्पायरी दवाइयों का बोलबाला : यह दवाइयां काफी सस्ती पड़ती है। खासकर ग्रामीण अंचल में अवैध चिकित्सकों को जेनरिक दवाइयों से इलाज करने में बेहद फायदा होता है। सरकार तक जेनरिक दवाइयों के इस्तेमाल की कथित छूट देती है। ग्रामीण अंचल में ऐसी दवाइयों की भी भरमार है जो एक्सपायरी हो चुकी हैं लेकिन उन्हें सील बदलकर इस्तेमाल किया जा रहा है। कहने को तो मेडिकल काउंसिल के प्रावधान यह है कि थोक दवाई विक्रय व चिकित्सा व्यवसाय एक ही स्थान पर नहींहोगा। लेकिन ऐसा हो रहा है। स्थान फिर चाहे राणापुर हो या फिर जोबट कभी भी इन स्थानों पर डीआई मेडिकल काउंसिल के निर्देशानुसार चेक करने नहींजाते।

लेकिन दवाई विक्रेता संतुष्ट

झाबुआ-आलीराजपुर जिले के लिए एकमात्र औषधी निरीक्षक न होने से दवाई विक्रेता खासे खुश हैं। यहींकारण है कि अभी तक दवाई विक्रेताओं की ओर से प्रशासन व सरकार से कभी मांग नहींकी गई कि जिले में स्थाई रूप से एक ड्रग निरीक्षक की तैनाती की जाए जो गलत दवाइयों का विक्रय रोक सके।

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