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Thursday, May 7, 2009

Who let the tigers out?

पन्ना से बाघ गायब होने का मामला: सेन के लीकेज पर सरकार खफा
May 07, 01:44 am

भोपाल। पन्ना नेशनल पार्क से बाघ गायब होने संबंधी विशेष केंद्रीय जांच दल के खुलासे से वन विभाग समेत सरकार के आला अधिकारी नाराज हैं। अपर मुख्य सचिव वन प्रशांत मेहता ने हाल ही में केंद्र सरकार को पत्र लिख कर कहा है कि जांच दल को मीडिया में ऐसा कोई खुलासा करने का अधिकार नहीं था। दूसरी ओर इस सनसनीखेज मामले पर मंगलवार को वन राज्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों की बैठक लेकर पन्ना के बाघ विहीन होने की बात छुपा कर रखने पर नाराजगी जताई।

राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघ विहीन होने को लेकर प्रदेश के राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों की यह दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं। प्रदेश के वन अधिकारी बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा प्रोजेक्ट टाइगर के पूर्व निदेशक पीके सेन की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय विशेष केंद्रीय जांच दल द्वारा पन्ना में दो दिन बिताने के बाद इस संरक्षित क्षेत्र में बाघ न होने की बात मीडिया से कहने पर आपत्ति जता रहे हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी और आला विभागीय अधिकारियों से चर्चा के बाद अपर मुख्य सचिव वन प्रशांत मेहता ने केंद्र को भेजे गए अपने खत में कहा है कि विशेष जांच दल का गठन पन्ना और कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या किन कारणों से घटी और इनकी संख्या कैसे बढ़ाई जा सकती है, इस पर सुझाव देने के लिए हुआ है। जांच दल को अपनी रिपोर्ट में इस बारे में अपने सुझाव व जांच के दौरान सामने आए तथ्य रखने चाहिए थे, लेकिन सेन समेत दल के सदस्यों ने पन्ना में मीडिया के सामने इस क्षेत्र के बाघ समाप्त होने की बातें कह कर अपने दायरे का उल्लंघन किया है। उन्होंने पन्ना के इकलौते नर बाघ के छतरपुर जिले में देखे जाने संबंधी सूचनाओं और उसकी खोज किए जाने की बातें भी कही हैं। ज्ञात रहे कि टाइगर रिजर्व में पिछली जनवरी में आखिरी बार देखे गए इस नर बाघ के आधार पर ही कान्हा और बांधवगढ़ से दो बाघिन भेजी गई हैं, जिससे बाघों की वंशवृद्धि हो सके। बाघिनों के वहां पहुंचने तक यह बाघ भी सरंक्षित क्षेत्र से विलुप्त हो गया।

अधिकारियों के इस रवैये से उलट प्रदेश को फिर सफेद बाघ वाला राज्य बनाने के जतन में जुटे वन राज्यमंत्री शुक्ल को पन्ना से बाघ गायब होने के खुलासे ने आहत किया है। लोकसभा चुनाव की व्यस्तता केबाद भोपाल आए शुक्ल ने मंगलवार को आनन-फानन में एक समीक्षा बैठक बुला कर अधिकारियों से पूछा कि पन्ना के बाघों पर काम कर रहे डॉ. रघु चुण्डावत सहित अन्य लोगों ने पहले जब वहां बाघ कम होने की बातें कहीं थीं, तो उसे गंभीरता से क्यों नही लिया गया? उन्होंने चुण्डावत पर वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई पर भी पूछताछ की। वन राज्यमंत्री ने बाघों की जानकारी रखने की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक बीट गार्ड को रोज उसकी बीट में बाघ के पगमार्क और अन्य पहचान के चिन्ह की जानकारी अधिकारियों को देने की व्यवस्था की जाए। पर्यटकों द्वारा देखे जाने वाले बाघों के संबंध में एक रजिस्टर में उनसे भी जानकारी भरवाई जाए।

वन मंत्री ने मांगी पन्ना में रहे अफसरों की लिस्ट

वन राज्यमंत्री शुक्ल ने पन्ना में अब तक पदस्थ रहे फील्ड डायरेक्टर सहित अन्य अधिकारियों की सूची मांगी है। उन्होंने विभाग के आला अधिकारियों से पूछा कि पन्ना सहित अन्य टाइगर रिजर्व में गड़बड़ी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ऐसे कौन से अधिकारी हैं जो लंबे समय से फील्ड में पदस्थ रहे और उनके कार्यकाल में वन्य प्राणियों की संख्या घटी है।

अफसरों ने सीएम और वन मंत्री को अंधेरे में रखा

पन्ना से बाघ गायब होने के मामले में बीते चार साल से वन विभाग लगातार शासन को अंधेरे में रखता आ रहा है। वर्ष 2005 में रघु चुण्डावत ने सबसे पहले पन्ना से बाघ कम होने की बात कही थी। इस संबंध में खबरें आने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा विभाग से जानकारी मांगी गई थी। दिसंबर 2005 में तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी डॉ. पीबी गंगोपाध्याय ने मुख्यमंत्री और वन मंत्री को जानकारी भेजी थी कि मार्च 2005 में हुई गणना में पन्ना में 34 बाघ हैं। इस पार्क में बाघों की संख्या में कमी के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। उन्होंने अवैध शिकार को इन वन्य प्राणियों के लिए चुनौती बताते हुए उनकी सुरक्षा के लिए रिटायर्ड आर्मी मैन को टाइगर रिजर्व में तैनात करने की बात भी कही थी। तब से अब तक वन विभाग लगातार इस बात को झुठलाता रहा है कि पन्ना के बाघ शिकार हो गए या मर-खप गए हैं।

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