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Saturday, May 30, 2009

Who cares about forests?

I have written earlier about disappearance of tigers and alleged corruption in purchase of guns

Now this news about number of crimes in different forest areas

भोपाल। वन्यप्राणियों के संरक्षण तथा वन अपराधों पर रोकथाम के नाम पर दो साल से विदेशी बंदूकें, पीडीए, लक्जरी वाहन तथा मोबाइल आदि करोड़ों रुपए खर्च कर खरीदे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री वन अपराध रोकने के लिए लगातार निर्देश दे रहे हैं लेकिन न वन अपराध रुक रहे हैं और न ही वन्यप्राणियों का शिकार रुक पा रहा है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वन अपराधों के मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा वन मंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले भी पीछे नहीं हैं। मुख्यमंत्री का क्षेत्र अवैध कटाई में तीसरे नंबर पर है तो मंत्री का अवैध शिकार के मामले में। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वनों तथा वन्यप्रणियों के संरक्षण के लिए आधुनिकीकरण के नाम पर की जा रही खरीदी का औचित्य क्या है? यह सिर्फ अवैध कमाई के उद्देश्य से तो नहीं की जा रही है? वन विभाग ने वन अपराधों के संबंध में 5 माह की जो रिपोर्ट तैयार की है, उससे यह भी पता चलता है कि अपराध उन अफसरों के क्षेत्रों में ज्यादा हुए हैं, जो किसी न किसी रूप में विवादित रहे हैं लेकिन सरकार ने उन्हें अच्छी पदस्थापनाएं दे रखी हैं।

पांच माह में अवैध कटाई के साढ़े 17 हजार से ज्यादा प्रकरण सामने आए हैं। इनका विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसमें जबलपुर तथा छिंदवाड़ा वन मंडल अव्वल हैं। अवैध कटाई में पहला स्थान रखने वाले जबलपुर में सीसीएफ के पद पर एसके त्यागी पदस्थ हैं। जबलपुर में 5 माह में अवैध कटाई के 2093 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। बता दें, श्री त्यागी जब बैतूल में पदस्थ थे तब अवैध कटाई के एक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निलंबित करने की सिफारिश की थी। लेकिन विभाग के तत्कालीन अफसरों ने उन्हें बचा लिया था। ऐसे अफसर से वन अपराध रोकने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। अवैध कटाई के 1803 मामलों के साथ छिंदवाड़ा दूसरे नंबर पर है। यहां पदस्थ सीसीएफ की प्रमोशन के बाद जबलपुर वृत्त में की गई पहली पदस्थापना चर्चित रही थी क्योंकि तब प्रमोशन के तत्काल बाद किसी भी अफसर को अच्छी पदस्थापना नहीं दी जाती थी। एक तथ्य यह भी है कि अवैध कटाई के सबसे ज्यादा 518 प्रकरण मुख्यमंत्री श्री चौहान के गृह जिले सीहोर में दर्ज किए गए हैं। एक समय श्री चौहान के गृह विधानसभा क्षेत्र बुधनी में जंगल कटाई के मामले ने तूल पकड़ा था तब भोपाल के सीसीएफ भानु गुप्ता थे। तत्कालीन मंत्री बाबूलाल गौर मौके का निरीक्षण करने पहुंच गए थे और उन्होंने खुद अवैध कटाई का हश्र देखा था। श्री गौर के अलावा स्वयं मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वन अफसरों को वन अपराधों पर काबू पाने के सख्त निर्देश दिए थे। प्रदेश भर में 6 माह में 272 जंगली जानवरों के अवैध शिकार किए गए हैं। 37 अवैध शिकारों के साथ यहां भी जबलपुर अव्वल है। हालांकि शहडोल में भी इतने ही शिकार के मामले दर्ज हैं। 27 अवैध शिकार के मामलों के साथ बालाघाट दूसरे नंबर पर है। बालाघाट में पदस्थ सीसीएफ आरजी सोनी को विधानसभा में गलत जानकारी देने के आरोप में छिंदवाड़ा से हटाया गया था। अवैध शिकार के मामले में वन मंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह जिला रीवा तीसरे नंबर पर है, जहां 24 जंगली जानवरों का शिकार 5 माह में हो गया है। इसके अलावा अवैध उत्खनन में ग्वालियर वृत्त अव्वल है। यहां छतरपुर दूसरे तथा शिवुपरी तीसरे क्रम पर है। कहने का तात्पर्य यह कि वनों व जंगली जानवरों के संरक्षण के नाम पर वन विभाग के आला अफसर अब तक करोड़ों की अमेरिकन बंदूकें, पीडीए, लक्जरी वाहन तथा मोबाइल आदि खरीद चुके हैं। इनकी खरीद अब भी लगातार जारी है लेकिन अवैध कटाई तथा अवैध शिकार रोकने में इनका कोई उपयोग देखने को नहीं मिल रहा है।

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