with love to indore

Tuesday, November 11, 2008

Assembly election candidate in Indore

From my Hindi blog.
Obviously typing in hindi is not that easy and people who made transliteration tools are not that proficient in Hindi (:-)) and we product of our cramming based education system are not that skilled in phonetics so mistakes are bound to creep in .

मैंने कही पढ़ा था कि "one gets the ruler one deserves" , इंदौर मैं विधानसभा प्रत्याशियों कि और नजर दौडाई जाए तो ये उक्ति बहुत ही सटीक मालूम पड़ती है . शुरुआत करते है इंदौर एक से जिसका बाशिंदा हूँ मैं. पहली बात यहाँ कि वोटर लिस्ट में मेरा नाम ही नही है . क्यों ? क्योंकि १८ वर्षों का होने के पहले ही में इंदौर से बाहर आ चुका था और अभी हिंदुस्तान में सरकारी तंत्र इतना चुस्त दुरुस्त नहीं हुआ है कि ऑनलाइन ही लोगो के नाम दर्ज कर सके. चुनाव आयोग कि वेबसाइट पर सुविधा तो है लेकिन पहले मुझे मेरे पिताजी का वोटर ईद ही मालूम नहीं था जब वो मालूम हुआ तब तक उस लिंक ने काम करना ही बंद कर दिया था मजे कि बात तो ये है कि और सब जिलो कि वोटर लिस्ट तो बड़ी आसानी से डाउनलोड कि जा सकती है लेकिन इंदौर पैर क्लिक करते ही गलती आ जाती है.

इंदौर एक में एक ईमानदार महिला उषा ठाकुर विधायक थी सीधी से बात है भ्रष्टाचारियों को तकलीफें हो रही होगी तो हिन्दी फिल्मों के विल्लें कि तरह गोल कलि टोपी लगाने वाले व्यक्ति को भाजपा का प्रत्याशी बनाया गया है सीधी सी बात है या तो गुटीय संतुलन साधा गया है या फ़िर पैसा लेकर टिकेट दिया गया है. कांग्रेस कि और से इंदौर कि छाती पर चढ़ कर बैठी शुक्ला परिवार के राजकुमार को टिकेट दिया गया है . पिछडों कि हितैषी होने का दंभ भरने वाली कांग्रेस ने इंदौर कि ५ सीटों में से तीन पर ब्राह्मणों को टिकेट दियें है और तीनो प्रख्यात राजनितिक परिवारों से है कोई नया खून या उभरता हुआ चेहरा नही है

इंदौर दो से ईमानदार बुजुरग नेता सुरेश सेठ को कांग्रेस ने टिकेट किसी भलमनसाहत के चलते नहीं बल्कि मजबूर के चलते दिया है क्योंकि विजयवर्गीय ने इंदौर दो का विकास तो किया है भले ही इसमें ख़ुद कितना भी पैसा बनाया हो तो इस पूरे विधानसभा इलाके के सिर्फ़ एक को छोड़ कर सारे वार्ड भी भाजपा के पास है लेकिन यहाँ एक प्रकार कि तानाशाई निर्मित हो चुकी है चंदू शिंदे और लालबहादुर वर्मा जैसे लोगने क्षेत्र के लोगो को आतंकित कर रखा है. कुछ महीने पहले इन वर्मा महाशय ने एक थाना प्रभारी का ट्रान्सफर सिर्फ़ इसलिए करवा दिया था क्योंकि उसने इनके गुर्गों से एक चोटी पार्टी के कार्यकर्त्ता को बचने कि हिम्मत की थी . लेकिन रमेश मंदोला असल में कैलाशजी से भी बदतर है कैलाशी कम से कम कार्य कुशल तो है अगर ३०% कह्येंगे तो बाकी का काम तो करेंगे लेकिन इन मंदोला महाशय ने तो बूढों के पेंशन में घोटाला किया था १२ लाख की आबादी में ये महाशय १ लाख लोगो को ६५ बरस के ऊपर गरीबी रेखा वालों को मिलने वाली पेंशन बाँट रहे थे कोई रेकॉर्ड नहीं थे और असल में इनके चुनाव प्रचार के फंड की तयारी हो रही थी अब कैलाश की इतना असर है की मामला उजागर करने वाले कलेक्टर की इंदौर से विदाई हो गई जांच आयोग का कार्यकाल १५ महीने बडे जा चुका है और उसके ऊपर मंदोला जी को टिकेट भी मिला है

इंदौर तीन सबसे दिलचस्प इलाका है शहर के ठीक बीचों बीच होने के कारन जैसे जैसे आबादी बढती गई ये इलाका अछूता रहा तो एक समय दूसरे क्षेत्रो की तुलना में इसके वोटर आधे हो चुके थे. अब चूँकि हिंदुस्तान भर के शहरो में मुस्लिम पुराने इलाकों में रहते है तो इस सीट पैर ३०-३५% मुस्लिम वोटरों के कारन कांग्रेस के लिए जितना बड़ा आसान हो गया था. यहाँ से मौजूदा विधायक आश्विन जोशी ने अपनी पकड़ और जनसंपर्क बनाये रखा है और कांगरी के एकदम गुंडे नेताओ से ये फ़िर भी बेहतर है भाजपा से निष्क्रिय और चुनाव के वक्त जगाने वाले गोपीकृष्ण नेमा को टिकेट दिया गया है. सबसे ज्यादा सर फुत्तोवल भी इसी सीट को लेकर हुई थी जब पिछली ६ बार से शहर की जंत पैर दुर्भाग्य की तरह मंडरा रही सुमित्रा महाजन अपने बेटे के लिए टिकेट चाहती थी मध्य प्रदेश में लगभग सभी नेताओं ने अपने बेटो भतीजो को जमकर टिकेट बांटे है और भाजपा को कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार इसके बाद रह नही जाता है. परिसीमन के बाद इस क्षेत्र में कांग्रेस के लिए जीतना टेडी खीर होगा ख़ास तुअर पैर इसलिए क्योंकि ब्लाक वोटिंग कर के मुसलमान बाकि मतदाताओं को इतना चिडा देतें है कि बाकि जनता भी उन्ही कि तरह प्रत्याशी पर ध्यान दिए बिना सीधें भाजपा को वोट करती है

कुछ ऐसी ही कहाँ क्षेत्र क्रमांक ४ कि है जहाँ कि जनता को लक्षमण सिंघजी ने कई वषों से धर्म कि अफीम सुंघा रखी है अब वो नही है तो उनकी धरम पत्नी और लड़का ये काम आगे बढायेंगे वंशवाद कके अरूपों कि परवाह भाजपा नहीं करती १९८९ के दंगो में मुसलमानों के रव्याई से परेशां हिंदू मतदाता कांग्रेस के लिए तो वोट नही ही करेंगे बची सिन्धी ,कांग्रेस कि और से सिन्धी प्रत्याशी और भाजपा कि और से शंकर लालवानी अगर भीतरघात करे तो ही मालिनीजी कि रह मुश्किल होगी वैसे उनको सहानुभूति का पूरा पूरा फायदा मिलेगा

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